सक्ती: रिश्वत लेने का कथित वीडियो वायरल होने के बाद कलेक्टर ने जैजेपुर तहसीलदार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. सक्ती कलेक्टर अमृत विकास टोपनो ने कहा कि जैसे ही वीडियो वायरल हुआ, हमें सूचना प्राप्त हुई तो हमने तत्काल कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया है.
सक्ती कलेक्टर ने लिया एक्शन: सक्ती कलेक्टर ने कहा है कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण अधिनियम के तहत हम कार्रवाई कर रहे हैं. हमने तीन दिन का समय दिया है. अगर तीन दिन में जवाब प्रस्तुत कर दिया तो ठीक है. अगर जवाब नहीं भी देते हैं तो भी हम उनके विरुद्ध जो भी उचित दंडात्मक कार्रवाई होगी, उसके लिए प्रस्तावित करेंगे
शिक्षक ने लगाए गंभीर आरोप: दरअसल जैजैपुर के रहने वाले दिलीप चंद्रा पेशे से शिक्षक हैं.दिलीप चंद्रा का आरोप है कि उनके दूर के रिश्तेदार चाचा पुष्पेंद्र चंद्रा ने करीब 8 माह पूर्व जैजैपुर तहसील में एक आवेदन प्रस्तुत किया कि दिलीप चंद्रा जिस जगह जहां रहता है, वो जमीन उसकी है. जिसकी पेशी कई महीनों से तहसीलदार एन के सिन्हा कर रहे थे.
शिक्षक दिलीप चंद्रा का पक्ष: दिलीप चंद्रा का कहना है कि जैजेपुर में मेरी पैतृक जमीन है. मुझे बंटवारे में मिली है. उस जमीन में एक पुष्पेंद्र चंद्रा नाम के व्यक्ति ने गलत आरोप लगाकर तहसीलदार के पास त्रुटि सुधार के लिए आवेदन दिया था. उसका प्रकरण चल रहा था. मैं पेशी में गया था. तहसीलदार ने पैसे की डिमांड की. मुझसे कहा गया कि जमीन का दस्तावेज तो आपके पक्ष में है लेकिन आप पैसे दोगे तभी आपके पक्ष में होगा.
दिलीप चंद्रा ने बताया, ''मैंने पैसे देने से मना कर दिया. मुझ पर फिर दबाव डाला गया. मैंने 24 मार्च को 15 हजार और 26 मार्च को 5 हजार रुपए दिए. 26 मार्च को पेशी थी. उन्होंने पैसे तो ले लिए लेकिन पेशी आगे बढ़ा दी. ड्राइवर के खाते में मुझसे पैसे लिए गए थे. फिर मुझसे एक लाख रुपए की मांग की गई. जब मैंने मना किया तो फिर 20 हजार रुपए देने के लिए बोला.''
दिलीप चंद्रा ने बताया कि ''15 मई को अधिकारी ने घर बुलाया. मैं पूरी तैयारी के साथ गया था कि पूरी रिकार्डिंग करुंगा और इसका प्रमाण रखूंगा और उच्च कार्यालय में दूंगा. मैं घर गया और उनके कहने पर ड्राइवर को पैसे दिए. फिर उनको पता चल गया कि मैंने रिकार्डिंग किया है तो मुझे तहसील ऑफिस बुलाया. मुझे डांटा और गालीगलौज की. उन्होंने कहा कि तुमने वीडियो बनाया है, मैं तुम्हे जेल भेज दूंगा. फिर मुझे 112 को फोन कर जेल भेज दिया. मुझे दूसरे दिन जमानत मिली.''
परेशान करने की दे रहे धमकी: दिलीप चंद्रा का आरोप है कि अब जब प्रकरण चल रहा है तो मुझे पेशी में बुलाते रहते हैं. हर पांच दिन छह दिन में पेशी में बुलाते हैं. मुझे दिन भर बिठाकर रखते हैं और पेशी में नहीं आया करके अपशेंट कर देते हैं. 19 जून को बोला गया कि आपके लिए वारंट जारी हुआ है. मुझे दिन भर बिठाकर रखे और शाम को 5 बजे पेशी हुई. मुझे फिर कहा गया कि तुम्हें ऐसे ही परेशान किया जाएगा. मेरे मन में डर बना रहता है. मेरा परिवार है. मैं एक शिक्षक हूं. 2005 से पढ़ा रहा हूं. मेरा थाना में या गांव में कोई शिकायत नहीं है.
शिक्षक पर ब्लैकमेलिंग का लगाया आरोप: वहीं जैजैपुर तहसीलदार एनके सिन्हा का कहना है कि वायरल वीडियो वास्तविकता में ब्लैकमेल करने का एक तरीका था. राजस्व प्रकरण के दस्तावेज को गायब करना और गायब करने के बाद ऑफिस में आकर अनुशासनहीनता करना, मोबाइल रिकार्डिंग करना और गालीगलौज करना, ये सब होने पर उसे जेल भेजा गया. उसको प्रकरण में वांछित सहयोग नहीं मिला. उस पर कार्रवाई न हो, इसलिए ये वीडियो वायरल करने को लेकर पिछले दो महीने से मुझे धमकी दिया जा रहा था.
तहसीलदार ने कहा कि जब मैं नहीं माना और प्रकरण मैंने अनुविभागीय अधिकारी को कार्रवाई के लिए भेज दिया तो उसने वीडियो वायरल किया. वह अपने कृत्यों से घिर गया, इसलिए वीडियो वायरल किया है. यह दो महीने पुराना वीडियो है.
तहसीलदार ने बताया कि यह धारा 115 का प्रकरण था. मेरे क्षेत्राधिकार नहीं था. इसको मैंने अग्रिम कार्रवाई के लिए एसडीएम को भेज दिया था. हम प्रतिवेदन अधिकारी होते हैं, और हमने प्रतिवेदन भेज दिया था. 26 मई के आसपास का यह त्रुटि सुधार का केस है.

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