FRAUD क्या फर्जी तरीके से चलाया जा रहा मस्तूरी प्रेस क्लब आखिर क्यों हुई शिकायत क्या हैँ ये झोल जानें पूरा मामला

 


बिलासपुर//साथियों कहते हैं पत्रकारिता मीडिया जगत देश का चौथा स्तंभ है और एक प्रकार से समाज का आईना भी पर यही आईना अगर झूठी और फर्जी तस्वीर दिखाने लगे खुद सवालों के घेरे में घिर जाए तो इसको चौथा स्तंभ कहना कैसे उचित होगा और देश के लोगों को क्षेत्र के लोगों को इन मीडिया के सदस्यों पर कैसे भरोसा होगा और लोग क्यों उनकी आर्टिकल या न्यूज़ को पढ़ेंगे ऐसा ही एक बड़ी खबर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र से है जो मीडिया से ही जुड़ा हुआ है जहां पचपेड़ी प्रेस क्लब और मस्तूरी प्रेस क्लब में ठंन गई है बताया जाता है कि कुछ महीने पहले पचपेड़ी प्रेस क्लब का पंजीयन हुआ और नियमानुसार इसको आगे बढ़ाया जा रहा था पर मस्तूरी प्रेस क्लब में बैठे पदाधिकारीयों व सदस्यों को यह उचित नहीं लगा और इन्होंने इसकी शिकायत कर दी इसके बाद पचपेड़ी प्रेस क्लब के सदस्यों और पदाधिकारीयों ने भी मस्तूरी प्रेस क्लब को फर्जी और गलत तरीके से चलाने का आरोप लगाकर शिकायत कर दी है जिसमें बताया गया है कि मस्तूरी प्रेस क्लब का पंजीयन सालों पहले हुआ था जिसमें 25 सदस्यों का नाम है पर ताज्जुब की बात यह है कि वर्तमान में जो मस्तूरी प्रेस क्लब का अध्यक्ष बना हुआ है विजय सुमन उनका इन 25 सदस्यों में नाम ही नहीं है वैसा ही रघु यादव हैँ जिसका नाम नहीं हैँ ऐसे कई और सदस्य हैं जो मस्तूरी प्रेस क्लब में बड़े पदों पर हैं और सदस्य बने हुए हैं लेकिन इन 25 रजिस्टर्ड प्रेस क्लब मस्तूरी के सदस्यों में इनका नाम कहीं नहीं है और ये फर्जी तरीके से मस्तूरी प्रेस क्लब को जनता को धोखे में रखकर अधिकारियों की आंखों में पट्टी लगाकर यह प्रेस क्लब मस्तूरी का संचालन कर रहे हैं अब इसी बात को लेकर पचपेड़ी प्रेस क्लब के द्वारा जिले में उच्च अधिकारियों से शिकायत करके इस पर जांच की मांग की गई है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए आवेदन किया गया है बताते चले की प्रेस क्लब पचपेड़ी के सदस्यों ने इस मामले को कोर्ट तक ले जाने की बात कही है और इस पर पूरी जांच कर फर्जी तरीके से प्रेस क्लब का गठन कर लोगों को चूना लगाने वालों को कड़ी सजा दीलाने की बात कही है बताया जाता है कि उनके द्वारा प्रेस क्लब मस्तूरी के नाम से बाकायदा एक ऑफिस का भी ओपनिंग कराया गया है और इसके लिए इन्होंने जमकर चंदे का वसूली भी किया है और क्षेत्र के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को यह बताया कि वह प्रेस क्लब मस्तूरी का गठन करके शपथ ग्रहण कार्यक्रम रख रहे हैं और अधिकारियों ने भी इनके बातों पर भरोसा करते हुए इनका साथ दिया जबकि हकीकत में मस्तूरी प्रेस क्लब में अध्यक्ष के साथ कई सदस्यों का नाम ही नहीं दर्ज है अब पूरा मामला कोर्ट में जाने के बाद जांच होने के बाद पता चलेगा कि कौन कितने पानी में है पचपेड़ी प्रेस क्लब का आरोप सही है या मस्तूरी प्रेस क्लब सही है देखना दिलचस्प होगा जांच के बाद क्या परिणाम आता है पर इतना तो तय है कि इतना सब कुछ होने के बाद लोगों के बीच अगर मस्तूरी प्रेस क्लब गलत साबित होता है तो यह कौन सा मुंह लेकर जनता के बीच रिपोर्टिंग करने पहुंचेंगे?


बड़ा सवाल... 


1 जिस मस्तूरी प्रेस क्लब का सालों पहले रजिस्ट्रेशन हुआ वो पंजीयन अभी भी जीवित हैँ फिर उसी नाम से दूसरा रजिस्ट्रेशन कैसे हुआ? 


2 जिनका नाम 25 रजिस्टर्ड सदस्यों में भी नहीं हैँ वो कैसे अध्यक्ष बना और सचिव बना?

 

3 क्या मस्तूरी प्रेस क्लब के पदाधिकारी और सदस्य फर्जी हैँ जो दूसरे के द्वारा कराए गए रजिस्टर्ड नाम और पंजीयन नंबर चुरा कर चला रहें हैँ? 


4 अगर ऐसा हैँ तो इन पर सख्त कार्रवाई नहीं होना चाहिए?

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