मैं हूं गुल्लक के जरिए शिक्षिका का नया नवाचार, बच्चे सीख रहे मनी मैनेजमेंट का पाठ

 


जीवन में यदि आप बचत कर रहे हैं तो यकीन मानिए ये बचत आपको मुश्किल दौर में सबसे ज्यादा सहायता देगी.बचत करने का गुण हमारे भारत में प्राचीन काल से रहा है.फिर चाहे वो बचत जल का हो,भोजन का हो या फिर धन का.बचत ही वो कुंजी है जिसके सहारे हम आने वाले कल के लिए अपना भविष्य सुरक्षित रख सकते हैं.इसी आने वाले कल को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से सरकारी स्कूल की शिक्षिका बच्चों को गुल्लक के माध्यम से बचत के गुर सीखा रही है.


गुल्लक वाली शिक्षिका का नवाचार : छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में सरकारी स्कूल की शिक्षिका इन दिनों प्रेरणादायक पहल कर रही है. सरकारी टीचर बच्चों को गुल्लक बांट कर रही हैं. जिसका उद्देश्य आज की बचत कल का बड़ा लाभ है.इस शिक्षिका का नाम रंजीता साहू है.इस अभियान में उनका साथ पति तुमनचंद साहू दे रहे हैं.शिक्षिका का मानना है कि गुल्लक से बचत के गुर सीखने पर शिक्षा में भी क्रांति लाई जा सकती है.रंजीता साहू की इस अभियान के बारे मे दूसरे स्कूल भी सराहना कर रहे हैं.



शिक्षा में नवाचार : छत्तीसगढ़ के धमतरी जिला धनहा धमतरी, धर्म की नगरी के नाम से तो जाना ही जाता है, लेकिन अब नवाचार के लिए भी जाना जाने लगा है. यहां शिक्षा के क्षेत्र में एक से बढ़कर एक नवाचार अपनाए जा रहे हैं. खासकर के सरकारी स्कूलों में नवाचार के माध्यम से बच्चों को नई सीख मिल रही है. मगरलोड ब्लॉक के लुगे गांव के शासकीय प्राथमिक शाला में सेवा दे रही रंजीता साहू ने अनोखी पहल की है. इस पहल का नाम "मैं हूं गुल्लक" है. इसे छत्तीसगढ़ी में मोर नाव बोदली कहा जाता है.

स्कूली बच्चों को दे रहे मिट्टी के गुल्लक : साहू दंपती तुमनचंद साहू और शिक्षिका रंजीता साहू ने बच्चों के जीवन में अनुशासन, बचत और समर्पण के मूल्य सिखाने के अनोखा रास्ता अपनाया है. दोनों शासकीय स्कूल के बच्चों को मिट्टी से बने गुल्लक बांट रहे हैं. इसकी शुरुआत उन्होंने लुगे के प्राथमिक विद्यालय से की. स्कूल के सभी शिक्षकों और बच्चों ने पैसे डालकर गुल्लक को अपने पास रखा.



त्याग और समर्पण का महत्व समझाने की कोशिश : रंजीता साहू का मानना है कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों को बचत की आदत डालना, त्याग समर्पण का महत्व समझाना है. हर बच्चे को प्रोत्साहित किया गया कि वे अपने गुल्लक में एक-एक रुपए जोड़ें और एक बड़े मिशन के लिए धन इकट्ठा करें. ये कदम न केवल बच्चों को आर्थिक अनुशासन सिखाने का प्रयास है, बल्कि उन्हें समाज और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए भी प्रेरित करता है. गुल्लक केवल पैसे जोड़ने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह बच्चों को सिखाता है कि छोटी-छोटी बचत बड़ी जिम्मेदारियों को पूरा कर सकती है.

मैं हूं गुल्लक यानी मोर नाव बोदली का आइडिया तीन बेटियों से मुझे मिला. 2 साल पहले मैंने अपनी बेटियों को तीन गुल्लक दिए थे. जिसमें मेरी बेटियों ने धीरे-धीरे पैसा इकट्ठा करना चालू किया. एक साल में एक बड़ी रकम इकट्ठा हो गई. जिसको मेरे बच्चों ने निर्धन एवं अनाथ बच्चों की सहायता करने वाली संस्था को दान कर दिया.जिससे उन्हें काफी मान सम्मान मिला. मेरे बच्चे और प्रोत्साहित हुए हैं.3 गुल्लक लेकर तीन उद्देश्य के साथ गुल्लक में पैसे डाल रहे हैं. जिनमें पर्यावरण संरक्षण एक पेड़ मां के नाम, शिक्षा के लिए, मानव एवं जीव सेवा के लिए थोड़ा थोड़ा पैसा इकट्ठा करना चालू किए. जिसे हर साल तीनों कार्यों के लिए लगाया जाएगा -रंजीता साहू, शिक्षिका



स्कूली बच्चे गुल्लक से कर रहे हैं बचत : स्कूल के बच्चों ने बताया कि मैडम ने हमें गुल्लक दिया है हम उसमें पैसे डाल रहे हैं और हम पैसे बचा रहे हैं. किसी ने कहा वह 50 रुपए गुल्लक में डाल चुके हैं तो किसी ने कहा 300 से 500 रुपए गुल्लक में डाल चुके हैं. यह बताते हुए बच्चों के चेहरे पर अलग ही मुस्कान नजर आ रही थी.


हमारे विद्यालय की रंजीता साहू और उनके परिवार द्वारा एक महत्वपूर्ण अभियान शुरू हुआ है. जो माध्यमिक शाला लुगे से शुरु किए हैं. इससे निश्चित ही बच्चों में आगे चलकर बचत की भावना विकसित होगी. छोटी-छोटी बचत से बच्चे बड़ी बचत कर पाएंगे.आने वाले समय में ये बचत लाभदाई होगा.बच्चे अपनी छोटी-छोटी आवश्यकताओं की पूर्ति कर पाएंगे - नरेंद्र कुमार सिन्हा,प्रधान पाठक




धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने भी इस कार्य की सराहना करते हुए कहा कि बहुत ही अच्छा प्रयास है. स्पेशली गुल्लक मिशन वाला. गुल्लक से फाइनेंशियल सेविंग करने भारतीय परंपराओं और संस्कृति में जुड़ा हुआ है.


इससे बचपन भी याद आता है. इसमें छोटी-छोटी बचत करके यह बचत हमारे जीवन भर काम आती है.रंजीता और तुमनचंद साहू की पहल धमतरी ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में अनुकरणीय लायक है- अबिनाश मिश्रा,कलेक्टर


क्या होता है गुल्लक : गुल्लक को प्राचीन काल से भारतीय घरों में धन संग्रह के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. न केवल एक साधारण मिट्टी का पात्र है बल्कि बचत और अनुशासन का पहला पाठ भी सिखाता है. इसका महत्व हर आयु वर्ग के लिए अद्वितीय है. गुल्लक बच्चों को छोटी-छोटी रकम बचाने की आदत डालता है. यह उन्हें धन का महत्व समझाता है.अनावश्यक खर्चों से बचने की शिक्षा देता है. गुल्लक आर्थिक अनुशासन का महत्व सिखाता है. इसमें पैसे जोड़ने की प्रक्रिया न केवल नियमितता लाती है, बल्कि भविष्य के लिए धन प्रबंधन की योजना बनाने की आदत भी विकसित करती है.


गुल्लक की सीख : गुल्लक हमें सिखाता है कि छोटी-छोटी बचत भी समय के साथ बड़े परिणाम ला सकती हैं. यह परिवार के सदस्यों को अपने भविष्य के लक्ष्यों के लिए पैसे इकट्ठा करने का एक सरल तरीका देता है. गुल्लक भारतीय संस्कृति का हिस्सा है. ये केवल एक वस्तु नहीं है, बल्कि इसमें जुड़ी भावनाएं, सपने और परिश्रम का प्रतीक है. मिट्टी से बने पारंपरिक गुल्लक पर्यावरण के लिए भी अनुकूल होते हैं, जो हमें प्राकृतिक संसाधनों के प्रति सम्मान सिखाते हैं.



समाज को मिलेगी नई दिशा : शिक्षिका रंजीता साहू की इस पहल ने पूरे समाज को एक नई दिशा दी है. उनके इस कदम ने यह साबित किया कि छोटे प्रयासों से बच्चों और समाज को बेहतर संस्कार और शिक्षा दी जा सकती है. विद्यार्थियों के पास गुल्लक नहीं होने की वजह से भी फिजूल खर्ची ज्यादा करते हैं. इस पहल से बच्चों के दिमाग में अब बचत करने की सोच पैदा होगी. गुल्लक के पैसों को बच्चे किसी अच्छे उद्देश्य के लिए उपयोग कर सकेंगे.


Post a Comment

0 Comments