पौष्टिक मोदक लड्डू से कुपोषण में आई कमी, महिलाओं को रोजगार भी

 


छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में कुपोषण और लो वेट बर्थ रेट बड़ी समस्या थी. इसे दूर करने जिला प्रशासन ने अनोखा प्रयास किया. जिले के हर गांव की गर्भवती महिलाओं को पोषण युक्त भोजन और दवाइयों के साथ उन्हें हेल्दी लड्डू बांटे जा रहे हैं.


कोरिया मोदक लड्डू क्यों बांटे जा रहे: कोरिया कलेक्टर चंदन त्रिपाठी ने बताया "कोरिया मोदक लड्डू बनाने का सबसे बड़ा कारण ये है कि जिले में 22 प्रतिशत बच्चे कम वजन वाले पैदा हो रहे थे. उनका वजन लगभग ढाई किलो से कम रहता था. इसे दूर करने के लिए आयरन, फोलिक एसिड टैबेलेट को शत प्रतिशत लागू किया गया. आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्म भोजन और अंडा दिया जाने लगा. लेकिन कई बार गर्भवती महिलाएं आंगनबाड़ी केंद्रों में नहीं पहुंच पाती. जिसकी वजह से उन्हें पोषण नहीं मिल पा रहा है. जिसके बाद पोषण युक्त मोदक लड्डू बनाकर उन्हें बांटने का फैसला किया गया. हर रोज सुबह शाम 20- 20 ग्राम के 2-2 लड्डू गर्भवती महिलाओं को बांटे जा रहे हैं."

कोरिया मोदक लड्डू के लिए लगाया गया यूनिट: जिले के बैकुंठपुर के आनी गांव में पौष्टिक कोरिया मोदक लड्डू यूनिट लगाया गया है. इस लड्डू यूनिट में बिहान योजना के अंतर्गत आने वाली ज्योति महिला और मां शारदा स्व सहायता समूह की महिलाएं पौष्टिक लड्डू बनाती है. ये लड्डू रागी, सत्तू, बाजरा, मूंगफली, तिल, गुड़, इलायची और देसी घी से तैयार किए जा रहे हैं. इन लड्डुओं को कोरिया मोदक लड्डू नाम दिया गया है. आइए आपको बताते हैं कोरिया मोदक लड्डू कैसे बनते हैं.

कोरिया मोदक लड्डुओं की ऐसे होती है पैकिंग: कोरिया मोदक लड्डू की खूबसूरत पैकिंग भी की जा रही है. 2 लड्डुओं का छोटा पैकेट बनाया जाता है. जिसे गर्भवती महिलाओं को हर रोज सुबह शाम खाने के लिए दिया जाता है. इसके अलावा दूरदराज इलाकों में भेजने के लिए 1 किलो के डिब्बे तैयार किए जाते हैं. पूरी साफ सफाई के साथ तैयार किए इन लड्डुओं को डिब्बों को सीलबंद डिब्बों में भरकर दूसरे गांवों में भेजा जाता है. डिब्बों पर बाकायदा निर्धारित एक्सपायरी डेट भी लिखी जाती है


कोरिया मोदक से कुपोषण दर में कमी: कोरिया मोदक लड्डुओं से जिले में कुपोषण दर में काफी कमी आई है. कलेक्टर चंदन त्रिपाठी ने कहा कि इन हेल्दी लड्डुओं को देने के बाद जिले में कुपोषण में व्यापक सुधार हुआ है. पिछले चार माह में 12 प्रतिशत की रिकवरी हुई है. कलेक्टर ने कुपोषण दर के सालभर के आंकड़े भी बताए है.

महिलाओं को रोजगार मिला: कलेक्टर ने बताया कि ठंड के दिनों में रागी और गर्मी के दिनों में चने का सत्तू का लड्डू दिया जा रहा है. इसमें गुड़, तिल और मूंगफली है. समूह की महिलाएं इन लड्डुओं को बना रही है. जिससे समूह की महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है. कोरिया मोदक लड्डू यूनिट में 12 महिलाएं है. जो लड्डू बनाने का काम करती है. इससे ना सिर्फ समूह की महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है बल्कि जिले में कुपोषण दर में भी कमी आई है.


गांव गांव में पोषण संगवारी महिलाएं बांटती है लड्डू: कलेक्टर ने बताया कि लड्डू बनाने के बाद इस गांव गांव में बांटने की जिम्मेदारी भी गांव की ही महिलाओं को दी गई है. कई महिलाएं स्वेच्छा से इस काम को कर रही है. जिन्हें पोषण संगवारी महिलाओं का नाम दिया गया है. ये महिलाएं गांव गांव जाकर गर्भवती महिलाओं को लड्डू बांट रही है. कलेक्टर ने कहा कि इसके लिए पोषण संगवारी महिलाओं को कोई मानदेय नहीं दिया जाता है. लेकिन उन्हें ये कहा गया है कि यदि वे पांच प्रसव ऐसा कराती है जिनमें जच्चा बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं. गर्भवती महिला का हीमोग्लोबीन लेवल अच्छा रहता है, नवजात का वजन बढ़ रहा है तो जिलास्तर पर उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा.

कलेक्टर ने कहा कि कोरिया मोदक लड्डुओं से कुपोषण में कमी आने से जच्चा बच्चा की सेहत में भी सुधार हुआ है. लगातार इस पर काम करने से आगे और अच्छा रिजल्ट मिलने की उम्मीद है. महिलाएं काफी खुशी से इन लड्डुओं को खाती है

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