छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस एनके व्यास ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में रेवेन्यू इंस्पेक्टर (RI) पदोन्नति परीक्षा की प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है। साथ ही राज्य शासन को नए सिरे प्रमोशन एग्जाम लेने की छूट दी है।कोर्ट ने माना है कि पदोन्नति परीक्षा में अनियमितता बरती गई, जिसके कारण प्रमोशन की प्रक्रिया संदेह के घेरे में है। इस स्थिति में पूरी प्रक्रिया को वैध नहीं माना जा सकता।
बता दें कि पटवारी से आरआई प्रमोशन की लिखित परीक्षा 7 जनवरी 2024 को आयोजित की गई थी। इसमें 2600 से अधिक पटवारी शामिल हुए। 29 फरवरी 2024 को जारी परिणाम में 216 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण के लिए चयनित घोषित किया गया, लेकिन बाद में केवल 13 उम्मीदवारों का अंतिम चयन किया गया। इसके बावजूद 22 लोगों को नियुक्ति दे दी गई, जिसके बाद विवाद शुरू हुआ।
प्रमोशन एग्जाम के खिलाफ याचिका
जब प्रमोशन एग्जाम में अनियमितता सामने आई, तब प्रमोशन से वंचित पटवारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। जिसमें एग्जाम की प्रक्रिया को दूषित और मनमाने बताते हुए चुनौती दी गई।
याचिका में बताया गया कि कम अंक पाने वाले पटवारियों को भी प्रमोशन के लिए पात्र माना गया है, जिसके कारण योग्य पटवारियों को प्रमोशन से वंचित होना पड़ा। याचिकाकर्ताओं ने प्रमोशन एग्जाम को निरस्त करने की मांग की थी।
I भर्ती घोटाले में 2 अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है।
आरआई प्रमोशन घोटाले का सामने आने के बाद पटवारी संघ और शासन के पत्र के आधार पर ईओडब्ल्यू ने 10 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इनमें से दो को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। जबकि, 8 की गिरफ्तारी अभी बाकी है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, इस मामले में 18 से अधिक लोगों की संलिप्तता पाई गई है। उनके खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है। कहा जा रहा है कि परीक्षा में शामिल उन पटवारियों पर भी कार्रवाई प्रस्तावित है, जिन्हें कथित अनियमितता के जरिए प्रमोशन दिया गया।
एक मामले में फेल हुए पटवारी को बाद में पास कर दिया। इसी तरह, पति-पत्नी और कुछ जगह भाइयों को साथ बैठाया गया। एजेंसी का दावा है कि प्रमोशन परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई और प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही लीक किए गए थे।

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