आखिर किसान की बेटी और किसान की पत्नी हूं… खेत से दूरी भला कैसे हो सकती है : श्रीमती कुमारी धनेश्वर भास्कर

 सरायपाली :- आखिर किसान की बेटी और किसान की पत्नी हूं… खेत से दूरी भला कैसे हो सकती है ।

जी हा आप इस पंक्ति को पढ़ कर आत्ममुग्ध हो जाएंगे क्योकि यह एक किसान की भावनाओं भरी पंक्ति है और यह किसान की बेटी , पत्नी कोई और नही हम सबकी जननायिका हर महिलाओं की प्रेरणास्रोत श्रीमती कुमारी भास्कर जिला मंत्री महासमुंद की वाणी से खेतो के बीच स्वम फ़सल काटते हुए हम सबको प्रेरणा दे रही है ।

इस फोटो वीडयो की हकीकत पता करने पर सत्य प्रकाश मे आया और सीधा श्रीमती भास्कर जी से इस विषय पर चर्चा किया गया ।

इस वीडियो के बारे मे श्रीमती भास्कर जी ने कहा की राजनीतिक और सामाजिक ज़िम्मेदारियों के बीच भी खेतों की पुकार सबसे ज़ोर से सुनाई देती है । इस बार असमय बारिश ने खेतों में पानी भर दिया, जिसके कारण हार्वेस्टर किनारों तक नहीं पहुँच सका । और फ़सल की स्थित देख किसान की बेटी हाथ मे हसिया थामे खेतो मे उतर गई, वहाँ का धान हाथ से ही काटने लगी उन्होंने कहा सच कहूँ तो, यही काम मुझे सबसे ज़्यादा सुकून देता है।


                                        वीडियो फाइल देखे


जब तक किसान अपनी ही फसल को हाथ से न छुए… जब तक मिट्टी की महक और पसीने की सुगंध साथ न मिले… तब तक मन को संतुष्टि नहीं मिलती।

किसानी मेरे लिए सिर्फ पेशा नहीं, पहचान है — और पहचान से दूरी कभी संभव नहीं । 















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